ग्रंथसार
गुरुदेव, रात्रि का यह अंतिम प्रहर और उषा का यह मधुर आगमन, क्या केवल प्रकाश का ही विस्तार है या इसके पीछे कोई गहरा बोध छिपा है?
ऋग्वेद · अध्याय 19
प्रथम मंडल: उषा और चेतना का उदय