ग्रंथसार
गुरुदेव की कुटिया के द्वार पर बहती शीतल वायु ने देवरात के मन के उलझे हुए प्रश्नों को जैसे एक दिशा दे दी।
यजुर्वेद · अध्याय 19
आध्यात्मिक संप्रभुता का मार्ग