ग्रंथसार
अनेक रूपों में व्याप्त उस एक परमतत्व की खोज, जो संपूर्ण सृष्टि के स्पंदन का आधार है।
यजुर्वेद · अध्याय 32
अनेक रूपों में एक सत्ता