ग्रंथसार
गुरुदेव की ज्ञानमयी वाणी से यज्ञ की अग्नि केवल वेदी पर नहीं, बल्कि हृदय में भी प्रज्वलित हो उठी।
यजुर्वेद · अध्याय 1
यज्ञ का पावन पथ