ग्रंथसार
जैसे सागर से निकली बूंद फिर सागर ही है, वैसे ही आत्मा का मूल आधार ब्रह्म है।
आत्मा और ब्रह्म · पाठ 3
ब्रह्म: संपूर्ण सत्य