ग्रंथसार
आत्म-विचार केवल एक बौद्धिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपने ही होने की गहराई में उतरने का एक जीवंत अनुभव है।
आत्मा और ब्रह्म · पाठ 9
आत्म-विचार: स्वयं की खोज