ग्रंथसार
अनेक पथों का होना किसी भ्रम का नहीं, बल्कि मानव स्वभाव की विशालता का प्रमाण है।
भक्ति, ज्ञान और कर्म · पाठ 1
स्वभाव की विविधता और मार्ग