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भक्ति, ज्ञान और कर्म
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भक्ति, ज्ञान और कर्म

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

भक्ति, ज्ञान और कर्म

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  1. ॐस्वभाव की विविधता और मार्गपाठ 1
  2. ॐभक्ति का स्वरूप और मनोभावपाठ 2
  3. ॐज्ञान और विवेक का मार्गपाठ 3
  4. ॐकर्मयोग और अनासक्तिपाठ 4
  5. ॐराजयोग का अनुशासनपाठ 5
  6. ॐमार्गों का मिलनपाठ 6
  7. ॐअनुग्रह और पुरुषार्थपाठ 7
  8. ॐश्रद्धा और जिज्ञासापाठ 8
  9. ॐमार्ग का चुनाव और स्वभावपाठ 9
  10. ॐआध्यात्मिक प्रगति के लिए दैनिक अभ्यासपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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