ग्रंथसार
चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित करना ही राजयोग का मुख्य लक्ष्य है, जिससे आत्मसाक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त होता है।
भक्ति, ज्ञान और कर्म · पाठ 5
राजयोग का अनुशासन