ग्रंथसार
क्या अंधविश्वास और जिज्ञासा के बीच का सूक्ष्म संतुलन ही आध्यात्मिक परिपक्वता का द्वार है?
भक्ति, ज्ञान और कर्म · पाठ 8
श्रद्धा और जिज्ञासा