ग्रंथसार
मोक्ष का अर्थ केवल कहीं चले जाना नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर उस अनंत सत्य को पा लेना है जो जन्म और मृत्यु की सीमाओं से परे है।
धर्म, कर्म और मोक्ष · पाठ 7
मोक्ष: मुक्ति का उन्मेष