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धर्म, कर्म और मोक्ष
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धर्म, कर्म और मोक्ष

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

धर्म, कर्म और मोक्ष

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  1. ॐधर्म के अनंत आयामपाठ 1
  2. ॐकर्म: क्रिया और चेतना का ताना-बानापाठ 2
  3. ॐसंसार और जीवन के चार पुरुषार्थपाठ 3
  4. ॐस्वधर्म: जीवन का व्यक्तिगत लयपाठ 4
  5. ॐकर्म: संकल्प, परिणाम और स्वतंत्रतापाठ 5
  6. ॐजीवन के चार आश्रम: विकास के सोपानपाठ 6
  7. ॐमोक्ष: मुक्ति का उन्मेषपाठ 7
  8. ॐसदाचार और जीविका का धर्मपाठ 8
  9. ॐविवेकपूर्ण निर्णय: धर्म की व्यवहारिक दिशापाठ 9
  10. ॐसमन्वय का जीवन: धर्म, कर्म और मुक्तिपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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