ग्रंथसार
समस्त विचारकों, कवियों और कलाकारों का संगम ही हमारी संस्कृति की वह अखंड धारा है, जो हर युग में एक नए अर्थ के साथ प्रकट होती है।
विचारक, कवि और कलाकार · पाठ 12
संस्कृति का सूत्रधार