ग्रंथसार
लोक की भाषा में रचे गए शब्दों ने ईश्वर को जन-जन के हृदय के द्वार तक पहुँचा दिया।
विचारक, कवि और कलाकार · पाठ 4
तुलसीदास, सूरदास और कबीर