ग्रंथसार
शक्ति जब चरित्र का निर्माण करती है, तो वह केवल बाहुबल नहीं, बल्कि संघर्ष और निष्ठा की गाथा बन जाती है।
वीर चरित्र · पाठ 4
भीम और कर्ण: बल और अटलता