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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐअस्पष्टता में साहसपाठ 1
  2. ॐहनुमान और सेवा का बलपाठ 2
  3. ॐअर्जुन और योद्धा का ईमानदार संदेहपाठ 3
  4. ॐभीम और कर्ण: बल और अटलतापाठ 4
  5. ॐअभिमन्यु: यौवन का साहसपाठ 5
  6. ॐभीष्म: प्रतिज्ञा का मूल्यपाठ 6
  7. ॐअंगद और जटायु: संदेशवाहक और संरक्षक का साहसपाठ 7
  8. ॐएकलव्य: गुरु के आशीर्वाद के बिना भक्तिपाठ 8
  9. ॐबर्बरीक: निस्वार्थ बलिदान की लोक स्मृतियाँपाठ 9
  10. ॐसाधारण जीवन में साहसपाठ 10
  11. ॐवीरता और हिंसा के बीच की सीमापाठ 11
  12. ॐअहिंसा का साहसपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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