ग्रंथसार
अधूरा ज्ञान हो या पूर्ण समर्पण, युवावस्था का साहस तो केवल निर्भय होकर आगे बढ़ने में ही झलकता है।
वीर चरित्र · पाठ 5
अभिमन्यु: यौवन का साहस