ग्रंथसार
सीखने की प्यास और श्रद्धा का वह दीप, जो किसी औपचारिक स्वीकृति का मोहताज नहीं होता।
वीर चरित्र · पाठ 8
एकलव्य: गुरु के आशीर्वाद के बिना भक्ति