ग्रंथसार
ज्ञान का अंतिम सोपान, जहाँ जीव स्वयं को पूर्ण ब्रह्म के रूप में पहचान लेता है।
ब्रह्मसूत्र · पाठ 16
अनंत ब्रह्म का साक्षात्कार