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16 पाठ · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

ब्रह्मसूत्र

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  1. ॐजिज्ञासा का आह्वानपाठ 1
  2. ॐशास्त्र और समन्वयपाठ 2
  3. ॐचेतन तत्व का बोधपाठ 3
  4. ॐवेदों की नित्यतापाठ 4
  5. ॐज्ञान की पात्रतापाठ 5
  6. ॐदर्शनों का समन्वयपाठ 6
  7. ॐतर्क की सीमाएंपाठ 7
  8. ॐशास्त्र का प्रमाण और लीलापाठ 8
  9. ॐन्याय और ईश्वर का स्वरूपपाठ 9
  10. ॐबाह्य-कारणता का खंडनपाठ 10
  11. ॐपारस्परिक निर्भरता का परीक्षणपाठ 11
  12. ॐब्रह्म की अद्वैततापाठ 12
  13. ॐजीव का स्वरूपपाठ 13
  14. ॐआत्मा की यात्रापाठ 14
  15. ॐज्ञान का फलपाठ 15
  16. ॐअनंत ब्रह्म का साक्षात्कारपाठ 16
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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