ग्रंथसार
क्या कभी आपने विचार किया है कि शुद्ध आत्मा पर संसार के दुखों की यह धूल आखिर जमी कैसे?
जैन दर्शन · पाठ 10
कर्म का भार और निर्जरा की कला