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14 पाठ · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐजीव और अजीवपाठ 1
  2. ॐसात तत्त्वपाठ 2
  3. ॐकर्म का भारपाठ 3
  4. ॐकरुणा का आचरणपाठ 4
  5. ॐसत्य का बहुआयामी स्वरूपपाठ 5
  6. ॐअनेकांतवाद और नयवादपाठ 6
  7. ॐसम्यक दर्शन-ज्ञान-चारित्रपाठ 7
  8. ॐतप, संवर और मोक्षपाठ 8
  9. ॐजीव और अजीव का स्वरूपपाठ 9
  10. ॐकर्म का भार और निर्जरा की कलापाठ 10
  11. ॐसिद्घत्व की अनंत ज्योतिपाठ 11
  12. ॐसम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र का मार्गपाठ 12
  13. ॐसत्य के अनंत आयामपाठ 13
  14. ॐपूर्णता का अंतिम उत्कर्षपाठ 14
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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