ग्रंथसार
सांझ की ढलती आभा में, गुरुवर की वाणी से फूटा वह प्रकाश जो स्वयं को खोजने का एकमात्र सूत्र है।
जैन दर्शन · पाठ 11
सिद्घत्व की अनंत ज्योति