ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि जो दुःख-सुख आपको विचलित करते हैं, क्या वे वास्तव में आपके हैं या मात्र मन के जल पर पड़ते प्रतिबिंब?
सांख्य दर्शन · पाठ 11
विवेक-ख्याति: यथार्थ का बोध