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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐविवेक की खोजपाठ 1
  2. ॐपुरुष और प्रकृति का द्वैतपाठ 2
  3. ॐतीन गुणों का संगीतपाठ 3
  4. ॐबुद्धि का प्रादुर्भावपाठ 4
  5. ॐअहंकार का उदयपाठ 5
  6. ॐइंद्रियों और तन्मात्राओं का जालपाठ 6
  7. ॐपच्चीस तत्वों का विन्यासपाठ 7
  8. ॐसृष्टि का चक्र: उद्भव और प्रलयपाठ 8
  9. ॐभ्रम का जाल: तादात्म्य का बंधनपाठ 9
  10. ॐगुणों का खेल: प्रकृति के तीन धागेपाठ 10
  11. ॐविवेक-ख्याति: यथार्थ का बोधपाठ 11
  12. ॐकैवल्य: परम मुक्तिपाठ 12
  13. ॐद्रष्टा की साक्षीपाठ 13
  14. ॐजीवनमुक्त का स्वरूपपाठ 14
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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