ग्रंथसार
नदी के शांत तट पर बैठे महर्षि और देवरात के बीच हो रहा यह संवाद उस सृष्टि के रहस्यों को खोलता है जिससे हम और यह ब्रह्मांड बने हैं।
सांख्य दर्शन · पाठ 7
पच्चीस तत्वों का विन्यास