ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि आपका दुख आपका अपना नहीं, बल्कि एक उधार लिया हुआ भ्रम है?
सांख्य दर्शन · पाठ 9
भ्रम का जाल: तादात्म्य का बंधन