ग्रंथसार
क्या यह विराट संसार केवल एक भ्रम है, या इसके पीछे कोई ऐसा सूक्ष्म आधार है जिसे हमारी आँखें देख नहीं पातीं?
वैशेषिक दर्शन · पाठ 3
परमाणु का सत्य