ग्रंथसार
एक शांत जलाशय के किनारे सत्य की खोज में निकले गुरु और शिष्य की यह संवाद-यात्रा भ्रम के जालों को भेदने का एक प्रयास है।
वैशेषिक दर्शन · पाठ 9
प्रत्यक्ष और अनुमान का मार्ग