ग्रंथसार
क्या समाधि के गहरे सन्नाटे में शून्य शेष रह जाता है या कोई प्रखर सत्य जाग उठता है?
योग दर्शन · पाठ 10
संप्रज्ञात समाधि का स्वरूप