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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐचित्त की प्रकृतिपाठ 1
  2. ॐपाँच क्लेशपाठ 2
  3. ॐअभ्यास और वैराग्यपाठ 3
  4. ॐईश्वर प्रणिधानपाठ 4
  5. ॐयम और नियमपाठ 5
  6. ॐआसन, प्राणायाम और प्रत्याहारपाठ 6
  7. ॐधारणा का अभ्यासपाठ 7
  8. ॐध्यान का निरंतर प्रवाहपाठ 8
  9. ॐसमाधि की परम स्थिरतापाठ 9
  10. ॐसंप्रज्ञात समाधि का स्वरूपपाठ 10
  11. ॐअसंप्रज्ञात समाधि का मौनपाठ 11
  12. ॐकैवल्य: परम मुक्तिपाठ 12
  13. ॐसिद्धियों का रहस्यपाठ 13
  14. ॐक्लेशों का चक्रपाठ 14
  15. ॐअष्टांग योग का मार्गपाठ 15
  16. ॐअस्तित्व का अनंत क्षितिजपाठ 16
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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