ग्रंथसार
सृष्टि के कण-कण में व्याप्त वही महाशक्ति जब हमारे हृदय में उतरती है, तो संपूर्ण जीवन एक अखंड प्रार्थना बन जाता है।
देवी स्वरूप · पाठ 10
देवी का एकात्म स्वरूप