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देवी स्वरूप
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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐदेवी: शक्ति और वात्सल्यपाठ 1
  2. ॐदुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती: त्रिविध कृपापाठ 2
  3. ॐपार्वती और सती: समर्पण की पराकाष्ठापाठ 3
  4. ॐकाली: करुणा का निर्भय स्वरूपपाठ 4
  5. ॐनवरात्रि के नौ स्वरूपपाठ 5
  6. ॐगृहस्थ जीवन में देवीपाठ 6
  7. ॐउत्सव और नव-चेतनापाठ 7
  8. ॐमातृ-शिशु का पवित्र संबंधपाठ 8
  9. ॐअनंत कृपा का स्वरूपपाठ 9
  10. ॐदेवी का एकात्म स्वरूपपाठ 10
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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