ग्रंथसार
देवी को केवल देवालयों में नहीं, बल्कि गृहस्थी की हर छोटी-बड़ी गतिविधि में महसूस करना ही सच्चे अर्थों में शक्ति की उपासना है।
देवी स्वरूप · पाठ 6
गृहस्थ जीवन में देवी