ग्रंथसार
ज्ञान की यह धारा उस समय से बहती आ रही है जब सृष्टि के आदि में ऋषिगण भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्रों से धर्म का मर्म जानने के लिए एकत्रित हुए थे।
मनुस्मृति · पाठ 1
संवाद का उद्गम