ग्रंथसार
संसार की विशालता और समय के चक्र को समझना ही उस विराट सत्ता को पहचानने की पहली सीढ़ी है, जिसमें सब कुछ समाहित है।
मनुस्मृति · पाठ 2
सृष्टि और काल का प्रवाह