ग्रंथसार
जीवन एक लंबी यात्रा है जिसे चार पड़ावों में विभाजित किया गया है, जहाँ हर पड़ाव स्वयं को गढ़ने का एक अलग अवसर लाता है।
मनुस्मृति · पाठ 4
जीवन के चार आश्रम