ग्रंथसार
घर केवल पत्थरों की दीवारों से नहीं, बल्कि सेवा, दान और कर्तव्यों के निर्वहन से एक पवित्र स्थान बनता है।
मनुस्मृति · पाठ 5
गृहस्थ के कर्तव्य