ग्रंथसार
ज्ञान केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि गुरु और शिष्य के बीच के उस पवित्र बंधन का नाम है जहाँ विवेक का उदय होता है।
मनुस्मृति · पाठ 6
शिक्षा और गुरु