ग्रंथसार
घर केवल दीवारों का समूह नहीं, बल्कि धर्म के पालन और परिवार के पोषण का वह पवित्र केंद्र है जहाँ से जीवन का संतुलन निर्धारित होता है।
याज्ञवल्क्य स्मृति · पाठ 4
गृहस्थ के कर्तव्य