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याज्ञवल्क्य स्मृति
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याज्ञवल्क्य स्मृति

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

याज्ञवल्क्य स्मृति

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  1. ॐयाज्ञवल्क्य का व्यक्तित्वपाठ 1
  2. ॐग्रंथ की संरचना और विस्तारपाठ 2
  3. ॐअध्ययन और दैनिक कर्तव्यपाठ 3
  4. ॐगृहस्थ के कर्तव्यपाठ 4
  5. ॐदान और अतिथि सत्कारपाठ 5
  6. ॐविवादों का समाधानपाठ 6
  7. ॐसाक्ष्य और गवाहों की भूमिकापाठ 7
  8. ॐदाय-भाग और पारिवारिक संपत्तिपाठ 8
  9. ॐप्रायश्चित और शुद्धिपाठ 9
  10. ॐटीका परंपरा का वैभवपाठ 10
  11. ॐग्रंथ की व्यावहारिक आत्मापाठ 11
  12. ॐव्यवस्था का उत्तराधिकारपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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