ग्रंथसार
पुराणों का संसार केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसा विशाल दर्पण है जिसमें लोक-श्रद्धा और ईश्वरीय सत्ता का अद्भुत संगम होता है।
स्मृति और इतिहास काल · पाठ 4
पुराणों की कल्पना और लोक-चेतना