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स्मृति और इतिहास काल
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स्मृति और इतिहास काल

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

स्मृति और इतिहास काल

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  1. ॐसूत्र साहित्य और धर्म का संहितीकरणपाठ 1
  2. ॐधर्मशास्त्र: धर्म की सामाजिक संरचनापाठ 2
  3. ॐइतिहास का स्वरूप: महाकाव्यों और आख्यानों की आत्मापाठ 3
  4. ॐपुराणों की कल्पना और लोक-चेतनापाठ 4
  5. ॐमंदिर और अर्चना की बढ़ती परंपरापाठ 5
  6. ॐदर्शन के छह मार्ग और चिंतन की धाराएंपाठ 6
  7. ॐश्रमण परंपराएं और महा-संवादपाठ 7
  8. ॐयुग का प्रभाव और धर्म का समन्वयपाठ 8
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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