ग्रंथसार
मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि भक्तों की सामूहिक आस्था का वह केंद्र हैं जहाँ मनुष्य स्वयं को परमात्मा के सम्मुख समर्पित करता है।
स्मृति और इतिहास काल · पाठ 5
मंदिर और अर्चना की बढ़ती परंपरा