ग्रंथसार
लंका की सभा में जब धर्म और अधर्म के बीच चुनाव की घड़ी आई, तब रावण के अपने भाई ने ही सत्य का मार्ग चुना।
भक्तों की कथाएँ · पाठ 11
विभीषण की शरणागति