ग्रंथसार

ग्रंथसारग्रंथसार
सत्संगप्रेरणातर्क–प्रमाणसंरचनापरम्पराएँग्रंथनया जुड़ाअवधारणाएँकथाएँयात्राएँकथा-झलकअधिक
भक्तों की कथाएँ
भक्तों की कथाएँ
भक्तों की कथाएँ

ग्रंथसार संग्रह

भक्तों की कथाएँ

12 पाठ · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

भक्तों की कथाएँ

followers…

पढ़ें
  1. ॐभक्त ध्रुव की कथापाठ 1
  2. ॐभक्त प्रह्लाद की कथापाठ 2
  3. ॐमाता शबरी की प्रतीक्षापाठ 3
  4. ॐसुदामा की मित्रतापाठ 4
  5. ॐगजेन्द्र मोक्षपाठ 5
  6. ॐराजा अम्बरीष और दुर्वासापाठ 6
  7. ॐअजामिल का उद्धारपाठ 7
  8. ॐविदुर का आतिथ्यपाठ 8
  9. ॐद्रौपदी का अक्षय पात्रपाठ 9
  10. ॐमाता कुन्ती की प्रार्थनापाठ 10
  11. ॐविभीषण की शरणागतिपाठ 11
  12. ॐभक्त उद्धव और गोपियाँपाठ 12
ग्रंथसार

ग्रंथसार

पढ़ें · सुनें · समझें

पुस्तकालयश्रवण

श्रेणियाँ

रामायणभगवद्गीतामहाभारतपुराणउपनिषद्तीर्थसंतकथा संसाररोज़ का ज्ञानसाधना

खोजें

  • सत्संग
  • प्रेरणा
  • तर्क–प्रमाण
  • संरचना
  • परम्पराएँ
  • ग्रंथ
  • नया जुड़ा
  • अवधारणाएँ
  • कथाएँ
  • यात्राएँ
  • कथा-झलक

ज्ञान

  • व्यक्ति
  • साधना
  • तीर्थ स्थल
  • पर्व
  • भाषाएँ

खाता

  • प्रोफ़ाइल
  • खोज
  • तर्क–प्रमाण
  • कुकी नीति

सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

  • होम
  • झलक
  • सत्संग
  • संग्रह
  • श्रवण