ग्रंथसार
चाहे वह घर की चारदीवारी हो या राज्य का विस्तृत विस्तार, नीति ही वह सूत्र है जो उत्तरदायित्व और विवेक को एक साथ पिरोती है।
नीति का परिचय · पाठ 3
गृहस्थ और शासक के लिए नीति