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नीति का परिचय
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नीति का परिचय

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

नीति का परिचय

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  1. ॐनीति का स्वरूपपाठ 1
  2. ॐधर्म और नीति की आवश्यकतापाठ 2
  3. ॐगृहस्थ और शासक के लिए नीतिपाठ 3
  4. ॐकाल का विवेकपाठ 4
  5. ॐसंयम का स्थानपाठ 5
  6. ॐसाधन और साध्यपाठ 6
  7. ॐनियम और अभ्यासपाठ 7
  8. ॐआत्मज्ञान ही प्रथम नीतिपाठ 8
  9. ॐविफलता से सीखनापाठ 9
  10. ॐकथाओं के माध्यम से नीतिपाठ 10
  11. ॐगृहस्थ और शासक की नीतिपाठ 11
  12. ॐआज के समय में नीति का उपयोगपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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