ग्रंथसार
जीवन की यात्रा का अंतिम और परम लक्ष्य यह है कि हम पीछे मुड़कर देखें, तो हृदय में संतोष और मुख पर एक निर्भय मुस्कान हो।
व्यवहार नीति · पाठ 12
बिना ग्लानि का जीवन