ग्रंथसार
प्रभु श्री राम का वन गमन केवल वनवास नहीं, अपितु लोक कल्याण के लिए धर्म की स्थापना का एक पुनीत संकल्प था।
अरण्यकाण्ड · प्रसंग 1
दण्डक वन में प्रवेश